विचार बैंक की आवश्यकता क्यों है ?

उत्तर –– विचार बैंक जैसे विषय को समझने का मौका आप के सामने पहली बार आया है । यह बात आश्चर्य की नही बल्कि सौभाग़़़़़्य की बात है। आज के समय में अपराजिकता इतनी फैली हुई है कि हम लोग अपने देश में कुछ नया होने की उम्मीद ही खो बैठे हंै कुछ नया करने की बात तो दूर रही। हम कुछ नया सोचने की हिम्मत तक नही जुटा पाते है ।

यह मानसिक अपराजिकता प्रत्येक व्यक्ति के लिय , प्रत्येक परिवार के लिय , प्रत्येक समाज व देश के लिय घातक है जो ऐसी मानसिकता को पैदा कर रहा है या उसमें जी रहा है। यह अपराजिकता हर उस समाज के लिय हर उस काल के लिय घातक है जिस समाज व काल में ऐसी मानसिकता बनती है , पलती है और बती है । आप को यह जान कर भी आश्चर्य नही होना चाहिए कि इस समय हमारे समाज के अधिकतम लोगो में घोर अपराजिकता फैली हुई है।

इस अपराजिकता की स्थिति कई दशको से लगातार बने रहने के कारण हमारे समाज में लगाातर ठहराव बरकरार है जिस कारण समाज के कई हिस्सो में ऊब पैदा हो चुकी है निश्चय ही बहुत से लोगो केे मष्तिस्क में इस ऊब से निकलने के लिय नये नये विचार उत्पन्न हुये हैं जिसकी पुष्टि वर्तमान समय में हो रहे परिवर्तनों से लगायी जा सकती है ।

यदि हम इतिहास का अध्ययन करें और यह ढ ूडें कि समाज में परिवर्तन के कारण क्या है ? और ये (परिवर्तन) कब उत्पन्न होता है ? तो हमें इतिहास यह बताता है कि जब ऐसी अपराजिकता ऐसा सामाजिक ठहराव समाज में व्याप्त हो जाता है जब इस दुनिया में सब कुछ स्थिरता की स्थिति में हो जाता है धनी व्यक्ति धनी ही बना रहता है और गरीब व्यक्ति गरीब ही बना रहता है लम्बे समय से जो यंत्र प्रयोग हो रहे होते हैं उन यंत्रों में कोई नया संशोधन नही होता है और बहुत लम्बे समय तक यह स्थिरता बनी रहती है तो इसका अन्तिम परिणाम यह होता है कि उस समाज के लोग उस ठहराव की स्थिति से उबने लगते है इस उब की स्थिति से निकलने के लिय उनके मन नये नये विचार उत्पन्न होने लगते है और समाज में परिवर्तन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है इस प्रकार यह कहना बिल्कुल सही होगा कि परिर्वतन का प्रथम कारण समाज का लम्बे समय तक ठहराव ही है इस बात की पुष्टि इतिहास के अध्ययन के द्वारा आसानी से की जा सकती है और इतिहास यह भी बताता है कि इस दुनिया में ऐसा कई बार हो चुका है।

जब ये अपराजिकता की मानसिकता और ठहराव लम्बे समय तक बना रहता है तो समाज इन कृतियों को करते करते उब जाता है उसकी आकांक्षाऐ कुछ नया करने के लिय प्रेरित करती है ये ही कुछ उबे हुये लोग शुरुआत में सामाजिक नीतियों में परिवर्तन चाहते है ।

परन्तु सुरुआत में सभी ने असंगठित रूप से ही प्रयास किये है परिणाम स्वरूप वे सभी परिवर्तनकर्ता अपने इस असंगठित प्रयास के कारण ही असफल रहे ।

जिसको जिस क्षेत्र में परिवर्तन करने की आवश्यकता महसूस हुई उसने उस क्षेत्र में परिवर्तन करने का प्रयास किया । कुछ लोग या समूह अपनी सांस्कृतिक नीतियों में परिवर्तन चाहते है और नई सांस्कृतिक विचारधारा को जन्म देते है इन समुहों का सदैव प्रयास रहता है कि पुरानी विचार धारा खत्म हो या संशोधन हो ।और इस नई विचार धारा को समाज अपनाये । इस प्रकार समाज में नई परम्पराओं का जन्म होता है और यही आगे चल कर सास्कृतिक परिवर्तन कहलाता है।

इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों में भी लोग परिवर्तन करने की कोशिश करते है आर्थिकी के क्षेत्र में धन उत्पादन के तौर तरीको से जो लोग उब चुके होते है वे इस आर्थिकी के क्षेत्र में परिवर्तन करने की कोशिश करते है ऐसे लोग नये नये धन उत्पादन के शाधनो को विकशित करते है इस क्षेत्र के परिवर्तनकर्ता अधिकतर स्टूमेंन्टल विचार ( आविष्कार ) व्यक्त करते है।

ऐसे ही कुछ लोग सामाजिक संचालन की नीतियों से उब चुके होते है वे सामाजिक संचालन की व्यवस्था में परिवर्तन चाहते है जैसे कार्लमाक्र्स ,गाँधी , आर टी चेन्ज।

इस परिवर्तन के समय में विशेष यह होता है कि हर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के विचार उत्पन्न होने लगते है प्रत्येक व्यक्ति कुछ नया करने की सोचने लगता है समाज में तरह तरह के विचार पैदा होते है। तरह तरह के विचारों पर प्रयोग होने लगते है । आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि समाज अपनी अपराजिकता के कारण उस समय इन विचारों का लाभ ही नही उठा पाता है ष्जबकि उस समय उन विचारों की तथा नये नये विचारों से बने नये शाधनों की अति आवश्कता होती है ष्लाभ न उठा पाने का मुख्य कारण तो उस समाज की अपराजिकता ही है क्योंकि बह समाज नये विचारों को स्वीकार करने तथा सहयोग करने की क्षमता ही खो चुका होता है। जिसका मुख्य कारण यह है कि समाज को कुछ भी नया होने की उम्मीद नही रह जाती है बह समाज जिस स्थिति में होता है उसी स्थिति में जीने की विवशता(मजबूरी) को स्वीकार कर लेता है जिसका अन्तिम दुष्परिणाम यह होता है कि समाज के सहयोग के अभाव में बहुत सारे प्रभावशालाी विचार अपराजिकता के अंधेरे में खो जाते है और इन विचारों के एक बार खो जाने के उपरान्त दुबारा पाना सम्भव नही हो पाता है । आर टी चेन्ज के द्रष्टि में इन विचारों का खोना समाज के लिय बहुत घातक सिद्ध होता है । हमारे वर्तमान समाज व आने वाले भविष्य को इस नुकशान से बचाने के लिय एक ऐसे कोष की आवश्यकता हुई है जिसमें समाज में उत्पन्न हर किस्म के विचारों को रखा जा सके और आवश्यकता अनुशार उनका प्रयोगीकरण किया जा सके । और मानव जीवन को और सरल सुगम और सैद्धान्तिक बनाया जा सके ।

इस आवश्यकता को हमारे ही देश के कई वरिष्ट व्यक्तियों ने महसूस किया है ।

देश के विद्वानों की द्रष्टि से

1 — ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम विचारों का बैंक जैसे विचार सें सहमत हैं और यह विचार ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम तक ले जाने वाले व्यक्ति डा0 लक्ष्मण प्रशाद के इस विचार से भी सहमत हैं कि यह बैंक विशेषकर शिक्षा संस्थानों में खोले जाये ।

डा0 लक्ष्मण प्रशाद का संक्षिप्त परिचय

— 1954 में सामाजिक कार्य में एम ए ।

— 2 दर्जन सें अधिक आविष्कारों को पेटेन्ट कराकर विज्ञान रत्न सम्मान प्राप्त किया।

— पिछले 30 वर्षों में इन्नोवेशन नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये ।

2 — फलसक्स इंडियन नाम की एक जनजाति जो की दीर्घकाल से नव विचारों के आदान प्रदान का वार्षिक आयोजन करती थी। आयोजन में आये सभी नवविचारों को लिपिबद्ध कर संग्रहित कर देती थी। इस आयोजन के लम्बे समय से होते रहने के कारण इस जनजाति के पास विभिन्न प्रकार के विचारों की श्रंखला बन गई थी। इस श्रंखला की एक किस्त(एक रजिस्टर) प्रसिद्ध आविष्कारक थाॅमस अल्वा एडिसन को मिल गई थी। कहा जाता है कि इस नवविचारों के रजिस्टर के मिलने के बाद थाॅमस अल्वा एडिसन ने नये आविष्कारों की लाइन लगा दी क्योंकि उन्हे नये विचारों के रजिस्टर से कुछ भी नया सोचने में बहुत मदत मिलती थी जिसके परिणाम स्वरूप थाॅमस अल्वा एडिसन ने लगभग 1093 आविष्कार कर डाले । यह जानकर शायद आप को आश्चर्य होगा कि फलसक्स इण्डियन नाम की यह जनजाति जोकि अमेरिका में रहती थी अनन्त नये विचारों के जानने के बावजूद अमनपसन्द थी।

3 – लेखक के विचार – आज हमें अपने समाज को अमन पसन्द बनाने के लिय हमें अपने समाज का बौद्धिक स्तर ऊॅचा करना होगा। बौद्धिक स्तर ऊॅचा करने के लिय अधिक से अधिक नवविचारों के प्रति समाज का प्रोत्साहन करना होगा और जो प्रोत्साहित समाज से नवविचार निकल कर आयेगंे उन्हे यथाशीर्घ किसी सुरक्षित स्थान पर संग्रहित करना होगा। उन विचारों में से उत्तम विचारों को समाज में प्रदर्शित व स्थापित करना होगा।

यदि हम चाहते है कि थाॅमस अल्वा जैसे आविष्कारक हमारे देश में हों और हमारे देश में अमन व शान्ति हो तो हमें उन कारणों व कार्यों को जानना होगा जिस कारण और कार्यों की बजह से बह इतने विकसित हुये। जब आप कारणों की पुष्टि करते हैं तो पता चलता है कि इन सफलताओं का मुख्य केन्द्रबिन्दु नव विचार व उसका संग्रह ही है

अतः आर0 टी0 चेन्ज विचार बैंक के द्वारा यथाशीघ्र इन केन्द्रबिन्दुओं को बडी संख्या में स्थापित करना चाहता है और समाज में अमन शान्ति और विकाश की एक नई राह देना चाहता है । हमारे वर्तमान समय में अमन शान्ति और विकाश की अति आवश्यकता है इस आवश्यकता की पूर्ति के लिय इस विचार बैंक की आवश्यकता अनिवार्य हो जाती है । जिस कारण विचार बैंक का स्थापना कार्य जगह जगह किया जा रहा है।

4 — वर्तमान समय में यदि कोई साधारण व्यक्ति अपना कोई विचार प्रस्तुत या प्रयोगीकरण करना चाहता है तो उसके लिय सरकारी या गैरसरकारी ऐसा कोई व्यवहारिक

(हम पूरे विश्वाश के साथ कह सकते हैं कि इसीलिय हमारे देश में अभी तक कोई प्रभावशाली विकाश या परिवर्तन नही हो पाया है )

5 – यह विषय हमारे देश के अति आवश्यक विन्दुओं में एक है जिसकी चर्चा हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति ऐ पी जे अब्दुल कलाम भी बहुत जोर देकर करते है कलाम जी के अनुशार नवविचारों का श्रोत युवा तथा इसका संग्रहकेन्द्र स्कूल मानते है । इस आवश्यकता की पूर्ति के लिय आर टी चेन्ज ने विचार बैंक को इस प्रकार व्यवस्थित किया है कि समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग इससे आसानी से सम्पर्क कर सकें।प्रत्येक व्यक्ति के सम्पर्क के उददेश्य से ही विचार बैंक की शाखाऐं स्कूलो में खोले जाने का प्रावधान है क्योंकि स्कूल में समाज के हर क्षेत्र व हर वर्ग के व्यक्ति के वच्चों का सम्पर्क होता है ।स्कूल में शाखा खोले जाने का एक मुख्य कारण ये भी है कि सबसे अधिक विचार किशोरावस्था व युवास्था , गरीबी ( अति आवश्यकता की स्थिति ) में ही आते है और इस उम्र के बच्चो का सबसे अधिक सम्पर्क स्कूल से रहता है ।

प्रश्न – सामाजिक ठहराव ज्यादा लाभप्रद है कि परिवर्तन ज्यादा लाभप्रद है?

उत्तर – हमारा मत है कि सामाजिक ठहराव वर्तमान समाज के लिय नुकशानदायक है लेकिन भविष्य में आने वाले समाज के लिय बहुत लाभदायक है क्योंकि ठहराव उदासी ,आलस ,स्थिरता आधुनिक साधनों का अभाव लाता है जिस कारण समाज में उब पैदा हो जाती है बह ठहरा हुआ समाज नई आवश्यकताओं को दन्म देता है। और आवश्यकता परिवर्तन की जननी है। और जो समाज द्वारा किया गया परिवर्तन समाज में उत्साह व वर्तमान समाज के आवश्यकताओं को पूरा करने लिय नये नये शाधनों का निर्माण करता है । अतः परिवर्तन वर्तमान समाज के लिय लाभप्रद है।

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