Self Make Changer

आर टी चेन्ज के उददेश्यों को पूरा करने के लिय कार्य प्रणाली व रूट का तरीका –
आर टी चेन्ज की कार्यप्रणाली की रचना इसके उद्देश्यो व कार्यों के अनुरूप बनायी गई है और इतनी सुगमता से बनाई गई है कि किसी भी व्यक्ति या कार्यकर्ता को इसका सहयोग करने या लाभ उठाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नही करना पडेगा।

नीचे एक डायग्राम दिखाया जा रहा है जिसे आप आसानी से समझ सकते है।

साधारण व्यक्ति (RUNNER)

व्यक्ति सहयोग राशि-30रू0
आर टी चेन्ज की सूचना लेना व देना
कार्य , सिद्धान्त व उदेश्य के बारे अध्ययन करना
यानी बह व्यक्ति जो आर टी चेन्ज के विचारों से प्रभावित हुआ है और जुडना चाहता है ।
योग्य — आर टी चेन्ज के लाभ पात्र

चेन्जर

सहयोग राशि – मासिक – 30रू0

चेन्जर – यानी बह व्यक्ति जो समाज में आर टी चेन्ज के कार्यों को लेकर सहमत है और अब परिर्वतनकर्ता बनकर आर टी चेन्ज के उददेश्यों को पूरा करना चाहता है या करता है ।

योग्यता – आरटी चेन्ज की विचारधाराओं व कार्यप्रणाली भलीभाति ज्ञान हो । अपना जीवन संगठन के अनूरूप ढालने में सक्षम हो ।

अनिवार्यता – एक चेन्जर के पास कम ये कम चार रनर होने चाहिए ।

योग्य – आर टी चेन्ज के लाभ पात्र

दक्ष

पैनल इन्चार्ज (दक्ष)
इसमें दक्ष की सभी विशेषताऐं होनी चाहिए
अनिवार्यता – 30 चेन्जर का निर्माता हो ।
संगठन के लिय पुर्ण रूप से समर्पित हो ।
कार्य – चेन्जर्स की सहायता व मार्गदर्शन करना ।
विशेष – दक्ष के पास एक तरह से 900 से ज्यादा लोग होंगे जिसका संचालन वह अपने विवेक , संगठन के सिद्धान्त व सांसारिक अध्ययन के आधार पर करेगा ।
दक्ष परिचय

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1 – दक्ष किसी भी स्थिति में स्थिरता को प्राप्त नही होगा। क्योंकि प्रकृति का प्रथम नियम ही परिवर्तन है और दक्ष प्रकृति के सिद्धान्तों द्वारा संचालित होता है इसलिय इसको रूकना मना है

2 – दक्ष के जीवन निर्वाह के लिय संगठन समर्पित होगा।

3- दक्ष के पास इस तरह से 900 लोगो से भी ज्यादा लोग सम्पर्क में हो चुके होंगे । जिसका संचालन वह अपने विवेक संगठन के सिद्धान्त व सांसारिक अध्ययन के आधार पर करेगा।

4 – प्रकृति सर्वशक्तिमान होते हुये भी इस ब्रहृमाण्ड में सभी को स्वतंत्र रखती है किसी भी जीव पर कोई बन्दिश नही लगाती है
और ना ही अपनी शक्यिो का किसी पर अपना स्वामित्व रखती है सबको अपनी दशा में जीने के लिये स्वतन्त्र रखती है किन्तु (प्रकृति) उसके साथ गलत व्यवहार करने वाले का उसके साथ खिलवाड करने वाले का उनके कार्य का परिणाम जरूर देती है अपनी निरन्तरता बनाये रखने के लियेे प्राकृतिक सन्तुलन बनाती है जो की प्रकृ्रति का अपना स्वभाव है या कह सकते है कि यह इसका सिद्धान्त है
और आप सभी को भलिभाति पता है कि जब प्रकृति अपना सन्तुलन बनाती है तो प्रकृति के साथ जितने खिलबाड किये गये होते है प्रकृति की संरचना में जितनी अव्यवस्था फैली होती है प्रकृति की गति में जितने अवरोध पैदा हो रहे होते है उनको एक झटके में अपने संचालन के अनुरूप कर लेती है और इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह होता है कि जो अवरोध पैदा हुये होते है वह अवरोध नष्ट हो चुके होते है प्रकृति अपनी क्रमधारा में संचालित होती रहती है प्रकृति पर कोई आंसिक असर नही पडता है किन्तु प्रकृति के अवरोधक नष्ट हो चुके होते है । मेरा यह कहने का तात्पर्य है कि प्रकृति इतनी सर्वशक्ति सम्पन्न होते हुये भी साधारण ही वितरती रहती है किसी प्रकार का स्वामित्व नही दिखाती है और जब अपने अवरोधो को नष्ट भी कर रही होती है तो किसी प्रकार की सीमा का उल्लंघन भी नही करती है
आप सोच रहे हांगंे कि इन बातों को बताने की आवश्यकता क्या है ? प्रकृति के स्वभाव को बतााने की आवश्यकता इस लिय पडी कि आप दक्ष के चरित्र की कल्पना स्वयं आसानी से कर सकें ।
चूंकि संगठन प्रकृति के नियमों व सिद्धान्तों व स्वभाव के आधार पर संचालित होता है और दक्ष संगठन के ( प्रकृति )के नियमों व सामाजिक अध्ययन के आधार पर अपने आप को संचालित करता है इसलिय दक्ष को अनिवार्य रूप से प्रकृति के स्वभाव के अनुरूप ही अपना स्वभाव निर्मित करने को कहा गया है ।

6 – दक्ष आर्थिक रूप से ,मानसिक रूप से सामाजिक रूप से सम्पन्न व शक्तिशाली होने के बावजूद उसका अपना जीवन साधारण ही बीतायेगा । साधारण का अर्थ है जैसे उसके समाज की स्थिति होगी वैसी ही उसकी स्थिति होगी ।
साधारण समाज की तरह ही अपना जीवन बितायेगा

दक्ष प्रकृति के तरह निरन्तर कार्य को करता रहेगा ।

दक्ष प्रकृति के तरह ही अपना जीवन व सभी कार्य सीमान्तित अवस्था में ही पूरा करे गा ।

दक्ष अपने कार्य की गति की निरन्तरता को बनाये रखने के लिय अपने आगे आये किसी भी प्रकार के अवरोध को तिनके की तरह उखाड फेकेगा।

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