दक्ष के सिद्धांत

1- दक्ष किसी भी स्थिति में स्थिरता को प्राप्त नही होगा क्योंकि प्रकृति का प्रथम नियम ही परिवर्तन है और दक्ष प्रकृति के सिद्धान्तों द्वारा संचालित होता है इसलिय इसको रूकना मना है|

2- दक्ष के जीवन निर्वाह के लिय संगठन समर्पित होगा।

3- दक्ष के पास एक तरह से कम से कम 900 लोगो से ज्यादा लोग सम्पर्क में होंगे । जिसका संचालन वह अपने विवेक संगठन के सिद्धान्त व सांसारिक अध्ययन के आधार पर करेगा।

4- चूंकि संगठन प्रकृति के नियमों व सिद्धान्तों व स्वभाव के आधार पर संचालित होता है और दक्ष संगठन के ( प्रकृति )के नियमों व सामाजिक अध्ययन के आधार पर अपने आप को संचालित करता है इसलिय दक्ष को अनिवार्य रूप से प्रकृति के स्वभाव के अनुरूप ही अपना स्वभाव निर्मित करने को कहा गया है ।

5- दक्ष आर्थिक रूप से ,मानसिक रूप से , सामाजिक रूप से सम्पन्न व शक्तिशाली होने के बावजूद उसका अपना जीवन साधारण ही बीतेगा। साधारण का अर्थ है जैसे उसके समाज की स्थिति होगी वैसी ही उसकी स्थिति होगी ।

6- दक्ष आर्थिक रूप से ,मानसिक रूप से , सामाजिक समर्थन रूप से सदैव निरन्तर विकाश करता रहेगा। दक्ष प्रकृति के तरह निरन्तर कार्य को करता रहेगा । दक्ष प्रकृति के तरह ही अपना जीवन व सभी कार्य सीमान्तित अवस्था में ही पूरा करेगा । दक्ष अपने कार्य की गति की निरन्तरता को बनाये रखने के लिय अपने आगे आये किसी भी प्रकार के अवरोध को तिनके की तरह उखाड फेकेगा।

7- दक्ष शिक्षा को विभिन्न प्रकार के ज्ञान का श्रोत मानते हुये सदैव शिक्षा को स्पष्ट रूप से ग्रहण करता रहेगा।

 

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