देवभूमि उत्तराखंड में पीने के पानी की किल्लत से परेशान हैं लोग – संगीता शर्मा 

चेन्ज न्यूज – उत्तराखंड के पहाड़ों से निकली कई नदियां उत्तर भारत के लोगों की प्यास बुझाती है और खुद उस प्रदेस के लोग के पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज हैं। उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में पीने के पानी की काफी किल्लत देखने को मिल रही है। जनता बूंद बूंद पानी के लिए भटक रही। ये हालात तब है जब मां गंगा,मां यमुना समेत कई नदियां यहीं से निकल कर बहती हैं l ये विचार “आप” प्रदेश प्रवक्ता संगीता शर्मा ने प्रेस को जारी एक बयान में व्यक्त किये l

उन्होंने कहा कि एक तरफ सीएम त्रिवेंद्र रावत कहते हैं कि एक रुपए में कनेक्शन मिलेगा, प्रधानमंत्री पहाड़ों में पानी की समस्या का बयान भी देते हैं औऱ सीएम की तारीफ भी करते है l जबकि हालात बद से बदतर हैं l प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश में पानी की समस्या नई नही है, लेकिन इसके समाधान के लिए उचित पहल नहीं की l प्रदेश की सत्तारूढ़ त्रिवेंद्र सरकार भी सत्ता में आने से पहले इस समस्या से भली भांति परिचित थी l लेकिन साढे 3 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस समस्या का निदान नहीं किया गया l बल्कि अब मीटर लगा कर पानी की खपत के आधार पर भुगतान की तैयारी हो रही।
पिथौरागढ़ के जिला मुख्यालय के अलावा जिले के प्रमुख कस्बों धारचूला, मुनस्यारी में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, जल संस्थान लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने से 40 हज़ार की आबादी परेशान है,लोग अपना काम छोड़कर पानी की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं, लोगों को औसत 20 मिनट पानी मिल पा रहा है l वहीं चम्पावत जिले में लोहाघाट व उसके आसपास के गांवो में भी पानी का संकट छाया रहता है, कुछ दिन पहले टनकपुर के एक वार्ड में भी पानी की समस्या को लेकर लोगों को परेशान होना पड़ रहा था, वहीं हल्द्वानी में भी पानी की किल्लत को लेकर लोगों को दो महीने से तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विकास नगर में भी ग्राम पंचायत जामनखाता के लक्ष्मीपुर गांव के सैकड़ों लोग 73 वर्षों से पानी के इंतजार में है, लक्ष्मीपुर गांव में 400 परिवार पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे हैं, साल 1999 में लक्ष्मीपुर में स्वजल परियोजना के तहत पेयजल की व्यवस्था की गई लेकिन वह भी धराशाई हो गई, उधर द्वाराहाट के ईडा गांव में पानी के लिए चल रहा आमरण अनशन अभी भी जारी है, लोग यहां पानी की बूंद बूंद के लिए परेशान हैं, ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि जल्द ही पेयजल की व्यवस्था को ठीक नहीं किया गया तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा, मसूरी कैम्पटी रोड स्थित श्रीनगर स्टेट और संतुला देवी परिसर में रहने वाले निवासियों ने जल संस्थान को ज्ञापन देकर जलापूर्ति करने की मांग की,
वहीं थराली में भी 14 दिन से राडीबगड़, केदारबगड़ कोटडीप व थराली बाजार के लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं, लोगों को पिंडर नदी व गदेरों से पानी लाना पड़ रहा है, मसूरी अनारवाला के लिए स्वीकृत 2 करोड़ 7 लाख की योजना 2014 से अभी तक बजट के अभाव में रुकी हैl जबकि पेयजल के लिए कई योजनाएं भारत सरकार और राज्य सरकार चला रही,वर्ल्ड बैंक इसके लिए पैसे भी देता लेकिन सरकार की नाकामी के चलते अधिकारी भी नींद में सोए हैं l अकेले हरिद्वार में 2 लाख से ज्यादा घरों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है,विश्व की आध्यात्मिक नगरी औऱ गंगा तट पर बसे हरिद्वार में आज भी 60000 परिवार पानी की दिक्कत को लेकर परेशान हैं। राजधानी देहरादून के रायपुर विधानसभा के गुरुविहार में पानी के लिए सड़कों में उतरना पड़ रहा है l
आप प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने जल जीवन मिशन योजना से गांव के लोगों को सिर्फ पानी नहीं बल्कि रोजगार भी देने की बात कही है लेकिन अभी जो हालात दिख रहे हैं, उससे यह जाहिर होता है कि सरकार पहले लोगों के जीवन को बचाने के लिए पानी की व्यवस्था करे उसके बाद रोजगार के बारे में सोचे l क्योंकि सरकार केवल खोखले वादे कर जनता को बरगला रही है, आप प्रवक्ता ने कहा कि पानी की समस्या इस प्रदेश में होना दुर्भाग्य की बात है क्योंकि उत्तराखंड कई नदियों का उद्गम स्थल है लेकिन यहां भी लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है, प्रवक्ता ने कहा कि अगर सरकार जल्द ही प्रदेशभर में पानी की समस्या को दूर नहीं करती है तो आम आदमी पार्टी जनता के साथ सड़को पर उतरने के लिए बाध्य होगी l

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